श्री चंद्र यंत्र चंद्र ग्रह को शांत और अनुकूल करने वाला अत्यंत शुभ यंत्र है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा मन, भावनाओं, मानसिक शांति, मातृत्व, और कल्पनाशक्ति का कारक ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पाप ग्रहों से प्रभावित हो, तो जीवन में मानसिक तनाव, अस्थिरता, अनिद्रा, और निर्णय लेने में कठिनाई जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। श्री चंद्र यंत्र की पूजा से चंद्र ग्रह मजबूत होता है, जिससे मन में शांति, स्थिरता, और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह यंत्र मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच, और परिवारिक सुख प्रदान करता है। मुख्य लाभ: मानसिक तनाव, चिंता और अस्थिरता को दूर करता है आत्मविश्वास और एकाग्रता में वृद्धि करता है पारिवारिक संबंधों में प्रेम और सामंजस्य लाता है मन को शांत करता है और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है कुंडली में चंद्र दोष को दूर करता है सामग्री: तांबा / भोजपत्र / गोल्ड प्लेटेड ऊर्जीकृत (Energized): हाँ (विशेष चंद्र मंत्रोच्चारण द्वारा) स्थापना दिशा: पूजा स्थल की उत्तर-पश्चिम दिशा (Vayavya Kona) देवता: चंद्र देव मंत्र: “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ॥” 🙏 उपयोग विधि (Puja Method): सोमवार या पूर्णिमा के दिन यंत्र की स्थापना शुभ मानी जाती है। यंत्र को गंगाजल या दूध से शुद्ध करें। सफेद कपड़े पर चावल रखकर यंत्र को स्थापित करें। दीपक और अगरबत्ती जलाकर ऊपर दिए मंत्र का 108 बार जाप करें। प्रतिदिन सुबह यंत्र को देखें और “ॐ चन्द्राय नमः” मंत्र बोलें। ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ): प्र.1: श्री चंद्र यंत्र का क्या महत्व है? ➡ यह यंत्र मन और भावनाओं को संतुलित करता है तथा मानसिक शांति प्रदान करता है। प्र.2: इसे कब स्थापित करना सबसे शुभ रहता है? ➡ सोमवार या पूर्णिमा के दिन प्रातः काल में इसका स्थापना करना सर्वोत्तम होता है। प्र.3: क्या यह यंत्र ऊर्जीकृत होता है? ➡ हाँ, इसे विशेष चंद्र मंत्रोच्चारण और पूजन द्वारा ऊर्जीकृत किया जाता है। प्र.4: इसे कहाँ रखना चाहिए? ➡ इसे पूजा स्थल की उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित करना चाहिए। प्र.5: क्या यह यंत्र सभी राशि के लोगों के लिए लाभकारी है? ➡ हाँ, यह यंत्र हर व्यक्ति के लिए लाभकारी है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनका चंद्र ग्रह कमजोर या पाप ग्रहों से प्रभावित है।